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Viral Test: करेंसी नोटों से फैलती हैं टीबी-अल्सर जैसी बीमारियां?

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क्या आपने कभी सोचा है कि जिस पैसे के लिए आप इतना दौड़-भाग करते हैं, वो कड़े-कड़े नोट आपको बीमार कर सकते हैं. इसकी वजह से आप सिर्फ एक या दो तरह की नहीं, बल्कि पूरे 78 तरह की बिमारियों की चपेट में आ सकते हैं. ऐसा हम नहीं कह रहे है, बल्कि ऐसी ही एक खबर इन दिनों सोशल मीडिया में वायरल हो रही है.

इस दावे के समर्थन में अखिल भारतीय व्यापारी संघ (कैट) के कई शोध रिपोर्टों का हवाला दिया गया है. इसमें कहा गया कि व्यापारी संघ ने केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर उनसे इस मुद्दे की जांच कराने का आग्रह किया किया कि क्या करेंसी नोट के इस्तेमाल से बीमारियां फैल रही हैं?




अखिल भारतीय व्यापारी संघ ने जिन शोध रिपोर्टों का उल्लेख किया है, उनमें ख़ास तौर पर काउंसिल ऑ़फ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के अंतर्गत काम करने वाले संस्थान इंस्टिट्यूट ऑ़फ गेनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी की शोध रिपोर्ट का जिक्र है. इस शोध के अनुसार करेंसी नोटों में ऐसे 78 प्रकार के बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो बीमारियां फैलाते हैं और इनसे पेट खराब होना, टीबी और अल्सर जैसी अन्य बीमारियां को खतरा होता है.

अखिल भारतीय व्यापारी संघ के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि वित्तमंत्री को इस मामले की जांच कराकर सही तस्वीर सामने लानी चाहिए और अगर ये शोध रिपोर्ट सही साबित होते हैं, तो इन बीमारियों से बचाव के उपाय किए जाने चाहिए.

व्यापारी संघ ने इस पत्र की प्रति केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को भी भेजी है और इनसे इस मामले में दखल देने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि ये रिपोर्ट साल 2015 में आई थी, लेकिन उन्हें अभी इसकी जानकारी मिली है, जिसके बाद उन्होंने सरकार को पत्र लिखा है.

वैसे पड़ताल में यह जानकारी मिली कि यह पहली बार नहीं है, जब नोटों से बैक्टरिया फैलाने के इस तरह के एक शोध की खबर आई है. इससे पहले भी साल 2015 में कई अखबारों ने इसे प्रमुखता से छापा था. इसमें भी इंस्टीट्यूट ऑ़फ गेनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी के वैज्ञानिक एस रामचंद्रन (जिन्होंने इस शोध के लिए पांच छात्रों के एक समूह का नेतृत्व किया था) की शोध रिपोर्ट का ही हवाला देते हुए खबर छापी गई थी.

जब रामचंद्रन से इस मसले पर एक बार फिर से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि इस तरह के शोध उनके देशों में हुए हैं और हमारे देश में ये शोध साल 2015 में किए गए थे. इसमें 10, 20 और 100 रुपये की जो कॉमन करेंसी नोट हैं, उनमें 78 जीवाणु के डीएनए पाए गए थे. इनमें से कुछ डीएनए तो ऐसे हैं, जो सांसों से जुड़ी बीमारी का शिकार बना सकते हैं.

इसके अलावा बाकी डीएनए फंगस के थे, जो नोटों को ख़राब कर देते हैं. इस प्रकार कहा जा सकता है कि इससे बीमारियों के फैलने की संभावना है, क्योंकि सूक्ष्म जीव वास्तव में नोटों के माध्यम से फैलते है.

इसी तरह साल 2016 में भी जर्नल ऑफ करंट माइक्रोबायोलॉजी एंड अप्लाइड साइंसेज में प्रकाशित एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए व्यापारियों के निकाय ने कहा कि माइक्रोबायोलॉजी विभाग, तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज, तमिलनाडु के विभाग में 120 मुद्रा नोटों में से 86.4 प्रतिशत रोग से दूषित थे, जो क्लेब्बिएला निमोनिया, स्टाफिलोकोकस ऑरियस जैसे रोगों का कारण बनते हैं. इनमें से अधिकतर कवक और बैक्टीरिया थे, जो डाइसेंटरी, तपेदिक और अल्सर का कारण बन सकते हैं.

इस मामले की और तहकीकात करने के लिए हमने सर गंगाराम हॉस्पिटल के डॉक्टर अतुल कक्कर से बात की और जानने की कोशिश की कि क्या करेंसी नोटों के छूने से टीबी और अल्सर जैसी खतरनाक बीमारियां फैलती है? इस पर उनका जवाब था कि करेंसी नोट से बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है, क्योंकि ये नोट हर तरह के लोगों से होकर गुजरते हैं. इससे पेट की बीमारियों, सर्दी, खासी, जुकाम और लंग इन्फेक्शन का खतरा रहता है.

जर्नल ऑफ कंटेम्पररी मेडिसिन एंड डेंटिस्ट्री ने भी इस तरह की रिपोर्ट छापते हुए नोटों में बैक्टीरिया होने की बात पर मुहर लगाई है.

अब इन बीमारियों से बचने के उपाय भी पढ़ लीजिए. इंस्टिट्यूट ऑ़फ गेनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी के वैज्ञानिक एस रामचंद्रन के मुताबिक नोट का प्रयोग साफ सुथरे हाथों से किया जाना चाहिए. अगर नोट पुराने हैं, तो उन्हें बदल लेना चाहिए और बहुत अच्छा रहेगा कि कैश का इस्तेमाल बहुत कम किया जाए.

इसके लिए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन बेहतर विकल्प हो सकता है. इन सब तरीकों से भी इनसे बचा जा सकता है|

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