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GST हो लागू तो 89 से 60 रुपये लीटर आ जाएगा पेट्रोल, डीजल होगा 50

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भारत बंद. सोमवार को पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के विरोध में विपक्ष में बैठे राजनीतिक दलों ने बंद का आह्वान किया. वहीं बंद के दौरान देश में पेट्रोल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं.

सोमवार को राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 23 पैसों की बढ़त के साथ पहली बार 80 रुपये के स्तर के पार रहीं. महाराष्ट्र में पेट्रोल की कीमत 87.77 रुपये रही. गौरतलब है कि महाराष्ट्र में पेट्रोल की कीमत 90 रुपये प्रति लीटर के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब हैं.

दरअसल देश में पेट्रोल की कीमत यदि 90 रुपये के स्तर को तोड़ सकती हैं. ग्लोबल मार्केट में लगातार कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है. महंगा कच्चा तेल खरीदने से जहां एक तरफ केन्द्र सरकार को अपने खजाने से अधिक रुपया खर्च कर पड़ रहा है वहीं देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं.

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ऐसी स्थिति में घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को काबू करने के लिए यदि केन्द्र सरकार और सभी राज्य सरकारें मिलकर अपने टैक्स में बड़ी कटौती करें तो कीमतों को काबू किया जा सकेगा. लेकिन इस कदम से दोनों केन्द्र और राज्य सरकारों को अपने राजस्व का एक बड़ा हिस्सा गंवाने पड़ेगा.

जहां राज्य सरकारों को अपने वैट में कटौती करने से उसे राज्यों में चलाई जा रही लोक कल्याण नीतियों को चलाने में वित्तीय संकट का सामना करना होगा. वहीं केन्द्र सरकार को दोहरी मार पड़ेगी. ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की लगातार बढ़ती कीमतों से अधिक डॉलर खर्च करना पड़ता है.

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हालांकि केन्द्र सरकार और राज्य सरकारें इस संभावना को नकार चुकी हैं कि वह जल्द पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाएंगे. लेकिन खास बात है कि मौजूदा स्थिति में यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतों को जीएसटी के दायरे में देखा जाए तो एक झटके में मुंबई में 87.77 रुपये प्रति लीटर बिक रहा पेट्रोल लगभग  12 से 15 फीसदी सस्ता हो जाएगा.

वहीं दिल्ली में पेट्रोल की कीमत को जीएसटी के 28 और 18 फीसदी के टैक्स दायरे जो देखें तो लगभग 9 फीसदी कम किया जा सकता है. राज्यों द्वारा वैट में कटौती से कम हुए पेट्रोल की कीमत को और सस्ता करने के लिए केन्द्र सरकार भी अपने एक्साइज टैक्स में भी मामुली कटौती की जा सकती है.

वहीं डीजल की कीमत को जीएसटी में दिए गए दूसरे और तीसरे टैक्स दर पर देखा जाए तो डीजल की कीमतों में भी 8 से 10 फीसदी की कटौती करते हुए कीमतों को 50 रुपये के दायरे में रखी जा सकती हैं.



  

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