पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और महंगाई को लेकरमोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने आज 'भारत बंद' किया है. कांग्रेस के इस बंद का 21 विपक्षी दलों, कई व्यापारिक और समाजिक संगठनों ने समर्थन है. वहीं, कुछ पार्टियां ऐसी भी हैं जो कांग्रेस के नेतृत्व करने के चलते इस विरोध में शामिल नहीं हो रही हैं.
कांग्रेस द्वारा बुलाए गए आज भारत बंद में एनसीपी, डीएमके, सपा, जेडीएस, बसपा, टीएमसी, आरजेडी, सीपीआई, सीपीएम, एआईडीयूएफ, नेशनल कांफ्रेंस, झारखंड मुक्ति मोर्चा, झारखंड विकास मोर्चा, आप, टीडीपी, केरल कांग्रेस, आरएसपी, आईयूएमएल, शरद यादव की पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल, राजू शेट्टी की स्वाभिमानी शेतकरी पार्टी और हिंदुस्तान अवाम पार्टी (हम) का समर्थन हासिल है.
कांग्रेस के इस भारत बंद के आह्वान पर विपक्ष के कई दल शामिल नहीं हो रहे हैं. इनमें बीजू जनता दल, टीआरएस और एआईएडीएमके जैसे कई राजनीतिक दल हैं जो 'भारत बंद' के खिलाफ हैं.
वहीं, ऐसे भी राजनीतिक दल हैं जो कांग्रेस ने जिन मुद्दों पर भारत बंद का आह्वान किया है, उन पर साथ हैं. लेकिन कांग्रेस के बंद के आह्वान के खिलाफ हैं. इनमें पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी टीएमसी ने कह रखा है कि जिन मुद्दों पर बंद बुलाया जा रहा है, वह उस पर साथ है. लेकिन पार्टी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की घोषित नीति के मुताबिक वह राज्य में किसी तरह की हड़ताल के खिलाफ है.
टीएमसी की नीति पर ही आम आदमी पार्टी भी है. आप के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा, 'यद्यपि मुद्दा सही है, लेकिन कांग्रेस को ईंधन मूल्य वृद्धि और भारतीय रुपये में गिरावट के मुद्दे पर कोई नैतिक अधिकार नहीं है. इस बात को हजम कर पाना कठिन है कि कांग्रेस भारत बंद का आह्वान कर रही है.'
उन्होंने कहा, 'मोदी सरकार पेट्रोल और डीजल कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि और भारतीय रुपये में रिकॉर्ड गिरावट को रोकने में अपनी विफलता के जरिए नागरिकों पर जुर्म कर रही है.'
मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा शिवसेना साथ रहते हुए भी विरोध में खड़ी रहती है. लेकिन इस मुद्दे पर वो कांग्रेस के साथ नहीं दिख रही है. शिवसेना ने भारत बंद में हिस्सा लेने के कांग्रेस के अनुरोध को ठुकरा चुकी है. कांग्रेस के आग्रह पर शिवसेना सांसद संजय राउत ने साफ कहा कि शिवसेना बंद में हिस्सा नहीं लेगी.
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