झारखंड सरकार ने साल 2015 में गावों के विकास के लिए मुख्यमंत्री स्मार्ट ग्राम योजना नाम से एक महत्वपूर्ण योजना शुरू की थी. इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत स्मार्टगांव की परिकल्पना की गई थी. यही नहीं, पांच गांव का चयन भी किया गया था लेकिन तीन साल के बाद भी यह योजना अभी कागजों में ही सिमटी है.
साल 2015 में की गई थी घोषणा
दरअसल, राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री स्मार्ट ग्राम योजना के अधीन पायलट प्राजेक्ट के तहत पांच गांव को स्मार्ट बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया था. इसके तहत जून 2016 तक गावों के चयन का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन काम कितनी तेजी से हुआ इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गांव की चयन की प्रक्रिया पूरी होने में साल बीत गया. जिनका चयन किया गया उनमें बोकारो के बुंडू, पूर्वी सिंहभूम के कातासोल, गुमला के शिवराजपुर, हजारीबाग के चेनारो और रांची के गिंजोठाकुर गांव हैं. मौजूदा स्थिति की बात करें तो चयनित पांच गावों में से अबतक सिर्फ कातासोल के समेकित विकास का करार हो सका है.
रांची जिले के गांव में भी काम शुरू नहीं
वहीं रांची से सटे गिंजोठाकुर गांव का अब तक विलेज डेवलपमेंट प्लान यानि वीडीपी ही तैयार नहीं हुआ है. जबकि बुंडू का वीडीपी का सरकार मूल्यांकन कर रही है. इसके अलावा शिवराजपुर के लिए तैयार वीडीपी में कुछ त्रुटिया रह गई हैं, जिसे दूर करने की फाइल बढ़ाई गई है. चेनारो का वीडीपी ग्रामीण विकास विभाग को मिल चुका है.
वीडीपी के मुताबिक एमओयू का मसौदा तय करने का निर्देश हजारीबाग जिला प्रशासन को भेजा गया है. इन चयनित गांव को स्मार्ट बनाने की कड़ी में ग्रामीण विकास विभाग ने 4.20 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है. संबंधित राशि अक्षय ऊर्जा, सूचना तकनीक, उन्नत कृषि, बाजार की उपलब्धता, प्रज्ञा केंद्रों को पेपरलेस बनाने आदि पर खर्च की जानी है.
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