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भीलवाडा के हर चौराहे पर हो श्मशान... आखिर क्यों ऐसा कहा संत तरुण सागर ने.

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भीलवाडा के समाज को मुनि तरुण सागर का दो बार सान्निध्य मिला। पहली बार वे आमलियों की बारी स्थित जैन मंदिर में आए थे। उनका दस दिन का कार्यक्रम रोड रामद्वारा में हुआ था। मंगल प्रवेश के दौरान उनकी पहली धर्मसभा सूचना केन्द्र चौराहे पर हुई थी। तब उन्होंने कहा था कि हर चौराहे पर श्मशान होना चाहिए, ताकि व्यक्ति को यह अहसास होता रहे कि उसका भी अन्तिम हश्र यहीं होना है। दूसरी बार उनका सान्निध्य 20 अप्रेल 2013 को मिला था। मंगल प्रवेश पर रेलवे स्टेशन पर हजारों की संख्या में श्रावक अगवानी करने आए थे। इस दौरान स्टेशन चौराहे पर मुनि तरुण सागर व जंगल वाले बाबा का संत मिलन का नजारा आज लोगों के जहन में है। चित्रकूट धाम में आयोजित दस दिवसीय कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जैन समाज को महावीर जयन्ती एक साथ मनाने का आह्वान किया था। उनके निर्देश पर महावीर जयन्ती का जुलूस एक साथ निकला था। वे चाहते थे कि भीलवाड़ा का जैन समाज एक होकर काम करे। मुनि ने भीलवाड़ा के प्रमुख जैन मंदिरों के दर्शन भी किए थे।...





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