उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में 68,500 सहायक शिक्षकों की हुई भर्ती सीबीआई जांच के घेरे में है. योगीराज के पौने दो साल के शासन में ये सबसे बड़ी भर्ती थी और उसी पर सवालिया निशान लगने लगे हैं. सरकार सीबीआई जांच से सामने करने के बजाय बचाव में खड़ी नजर आ रही है. ऐसे में योगी सरकार पर सवाल खड़े होने लगे हैं.
हालांकि विपक्ष में रहते हुए बीजेपी ने अखिलेश सरकार के दौरान हुई भर्तियों को लेकर सवाल खड़े करने के साथ-साथ विरोध प्रदर्शन किया था. लेकिन अब उन्हीं के सरकार के दामन पर दाग लगा है और सपा योगी सरकार को भ्रष्टाचारी सरकार बता रही है.
योगी सरकार का भ्रष्टाचारी चेहरा सामने आ गयाः सपा
सपा के प्रवक्ता सुनील साजन ने आजतक से बातचीत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में 68,500 शिक्षकों की भर्ती योगी सरकार के भ्रष्टाचार की एक कड़ी का हिस्सा है. प्रदेश जिन अफसरों के दामन पर प्रदेश युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगा योगी सरकार उन्हीं के द्वारा जांच करा रही थी. इससे साबित होता है कि सरकार इस पूरे भ्रष्टाचार में शामिल है.
उन्होंने कहा कि शिक्षक भर्ती में जिस तरह से पास अभ्यर्थियों को जानबूझकर फेल किया गया और मनमाने तरीके से अपने लोगों की भर्ती की गई. इस मामले में शिक्षा मंत्री से लेकर कई अफसर जेल जाएंगे. कोर्ट ने जिन 6 सवाल खड़े किए हैं, उससे योगी सरकार की असलियत लोगों के सामने आ गई है.
सीबीआई से क्यों भाग रही है सरकार
योगी सरकार अब शिक्षक भर्ती को सीबीआई जांच कराने के बजाए आदेश को चुनौती देने के लिए डबल बेंच में अपील करने की तैयारी कर रही है. गुरुवार को देर रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा डॉ. प्रभात कुमार चर्चा हुई. जिसके बाद डॉ. प्रभात कुमार ने मीडिया से कहा कि जिनको नियुक्ति पत्र मिल चुका है, उनकी नौकरी की सुरक्षा सरकार करेगी.
उन्होंने कहा कि 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती की सीबीआई जांच कराने की कोई जरूरत नहीं है. क्योंकि भर्ती की उच्च स्तरीय जांच शासन ने खुद कराई है और इसमें कोई आपराधिक कृत्य सामने नहीं आया है.
शून्य अंक मिलने पर कोर्ट गई थीं सोनिका
बता दें कि 68,500 सहायक शिक्षकों की भर्ती में भारी गड़बड़ियों को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी है. सीबीआई को 6 माह में जांच पूरी करने के लिए कहा है. परीक्षा में धांधलियों, बार कोड के बावजूद उत्तर पुस्तिकाएं बदलने और सही जवाबों पर भी शून्य अंक देने के खिलाफ कोर्ट में सोनिका देवी की याचिका समेत कुल 41 याचिकाएं दायर की गई थी.
जस्टिस इरशाद अली ने सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करते हुए कहा कि परीक्षा में सामने आई गड़बड़ियां तीन मूल अधिकारों अभिव्यक्ति, जीवन और समानता का हनन करती हैं. बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों के मामले सामने आए, जिन्हें 65 नंबर दिए गए. उनके 3-4 प्रश्नों के जवाब सही होते हुए भी शून्य अंक दिए गए, जिससे वे चयन से बाहर हो गए. सोनिका देवी का तो जानबूझकर चयन नहीं किया गया, इन मामलों को न्यायिक जांच के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता.
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