Home Top Ad

Responsive Ads Here

अयोध्या में चाहिए मंदिर, मंजूर नहीं योगी सरकार की राम प्रतिमा'

Share:





'


काशी की धरती पर चल रही तीन दिवसीय धर्म संसद के दूसरे दिन भी राम मंदिर का मुद्दा छाया रहा. जहां देश-विदेश से आए धर्म सांसदों ने एक स्वर में अयोध्या में भव्य राम मंदिर के लिए हुंकार भरी और भगवान राम के तम्बू में निवास को सौ करोड़ सनातनियों का अपमान माना. वहीं यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा अयोध्या में प्रस्तावित भगवान राम की दुनिया सबसे ऊंची प्रतिमा के विषय पर निंदा प्रस्ताव पारित हुआ.

काशी के दक्षिणी छोर पर स्थित सीर गोवर्धन में चल रहे धर्म संसद के दूसरे दिन के दोनो सत्रों में मंदिर रक्षा विधेयक के साथ साथ धर्मांतरण विधेयक, वैदिक शिक्षा पद्धति और गंगा संरक्षण जैसे विषयों पर गहन विमर्श का दौर चला. जल पुरूष के नाम से विख्यात राजेंद्र सिंह ने धर्म संसद में प्रदेश सरकार द्वारा भगवान राम की प्रतिमा के निर्माण के विषय पर निंदा प्रस्ताव रखा. जिसका सभी धर्म सांसदों ने करतल ध्वनि से समर्थन किया. उन्होंने कहा कि जहां पूरे देश के सनातनी रामलला के मंदिर के लिए कटिबद्ध हैं, ऐसे में मूर्ति की बात रामभक्तों के साथ बेईमानी है.

धर्माचार्य अजय गौतम ने कहा रामलला टेन्ट में हैं और उनके छद्म भक्त लाखों का सूट बूट पहन कर घूम रहे हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा चाहती है कि अयोध्या में आदर्श राम का मंदिर बने लेकिन संत समाज और सनातनी हिन्दू घट-घट व्यापी राम का मंदिर बनवाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. वहीं अयोध्या से आए रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण ने कहा कि यह अत्यंत दुःख का विषय है कि भगवान राम भी देश के सामान्य जनमानस की तरह दशकों से न्याय का इंतजार कर रहे हैं. अब समय आ गया है कि देश के समस्त सनातनी, शंकराचार्य के नेतृत्व में खड़े हों और भव्य एवं नव्य राम मंदिर के निर्माण में अपनी आहुति दें. उन्होंने जनता द्वारा चुने गये संसद सदस्यों को भी इस प्रकार की धर्म संसद में हिस्सा लेने की अपील की.

यह भी पढ़ें: वाराणसी: धर्म संसद में प्रस्ताव पारित- गंगा पर बने सभी डैम तोड़े जाएं

उत्तराखण्ड के गोपाल सिंह ने कहा कि धर्म से खिलवाड़ प्रकृति भी सहन नही कर पाती. जैसे ही उत्तराखण्ड के धारी देवी का मन्दिर तोड़ा गया, केदारनाथ में त्राहि-त्राहि मच गई. उत्तराखण्ड के ही हेमन्त ध्यानी ने कहा कि विकास की आसुरी दृष्टि पावनता और पवित्रता को निगल रही है. वर्तमान सरकार को लाभ हो तो वह आस्था के केंद्रों को तोड़ने में भी नही हिचक रही. उन्होंने दिवंगत स्वामी सानन्द द्वारा तैयार किये गए गंगा रक्षा विधेयक को सदन में सबके सम्मुख रखा और उनकी मांग पर एक स्पष्ट धर्मादेश की मांग भी की.

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य और प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अगले परम धर्म संसद की घोषणा करते हुए बताया कि आगामी अर्धकुम्भ के अवसर पर प्रयागराज में 29 से 31 जनवरी, 2019 तक धर्म संसद का आयोजन किया जाएगा. 

  

from hindi news https://ift.tt/2TNhqRK
via IFTTT