शिव सेना ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण मुद्दे के बाद अब मूर्ति के मसले पर अपनी राजनीति को हवा देना शुरू कर दिया है. पार्टी ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभ भाई पटेल की सबसे ऊंची मूर्ति के निर्माण को अंजाम देकर अपने सपने को पूरा किया है. लेकिन छत्रपति शिवाजी ही सच्चे हिंदू हृदय सम्राट हैं इसलिए दुनिया में उनकी सबसे ऊंची मूर्ति बननी चाहिए.
शिव सेना के मुखपत्र 'सामना' में छपे एक लेख में कहा गया है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने जिस हिम्मत से मराठा आरक्षण की घोषणा की उसी हिम्मत से शिवजी महाराज की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा के निर्माण की घोषणा उन्हें करनी चाहिए. शिवा जी की प्रतिमा अन्य किसी भी नेता की तुलना में बड़ी और ऊंची ही होनी चाहिए और उसके लिए सिर्फ फडणवीस सरकार ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र के सभी दल के नेताओं को एक होना चाहिए.
शिव सेना ने कहा कि सरदार पटेल की प्रतिमा ऊंची साबित हो इसीलिए शिवाजी की प्रतिमा की ऊंचाई को कम करना संकुचित, विकृत मानसिकता की निशानी है. यह भी कहा गया है कि छत्रपति शिवाजी के कद का कोई नेता भी नहीं है. फडणवीस को दृढ़ होकर बताना चाहिए कि शिवाजी से अधिक ऊंचाई की कोई प्रतिमा नहीं होगी.
पार्टी ने कहा कि गुजरात में स्थापित सरदार पटेल की प्रतिमा मतलब 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' अंतरिक्ष से भी दिखाई देने की वजह से मोदी भक्त खुश हैं. सरदार पटेल के कार्यों की ऊंचाई मोदी भक्तों से भी बड़ी है. पटेल की प्रतिमा अंतरिक्ष से दिखाई देती है. इसलिए पटेल बड़े नहीं, पटेल जैसा बड़ा कार्य करके दिखाना ही पटेल की ऊंचाई नापने का असली पैमाना है.
शिव सेना ने कहा कि पटेल की प्रतिमा 182 मीटर है और वह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा मानी जा रही है. 'पटेल की प्रतिमा दुनिया की सबसे भारी प्रतिमा बने इसलिए मुंबई के समुद्र में बनने वाली छत्रपति शिवा जी की मूर्ति की ऊंचाई कम कर दी गई है.' ऐसा नया आरोप राष्ट्रवादी के प्रांत अध्यक्ष जयंत पाटील ने लगाया और वह साबित हो इस तरह की घटनाएं हो रही हैं."
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