2019 के लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने घोषणापत्र तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया था, जिसके मुखिया पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम बनाए गए थे. घोषणापत्र समिति के साथ मुलाकात के दौरान राहुल गांधी ने सीधा निर्देश दिया था कि घोषणापत्र कमरों में बैठकर तैयार न किया जाए. घोषणापत्र सिर्फ अपनी सोच के हिसाब से नहीं, बल्कि जनता की इच्छा के मुताबिक तैयार किया जाए. इसके लिए अलग-अलग समूहों के लोगों से मुलाकात की जाए और यह जानने की कोशिश की जाए कि आखिर लोग क्या चाहते हैं?
राहुल गांधी के दिशानिर्देश के बाद घोषणापत्र समिति ने अपनी शुरुआती रणनीति को अंतिम रूप दे दिया. सूत्रों के मुताबिक 19 अक्टूबर को विजयादशमी के बाद 20 अक्टूबर से घोषणापत्र समिति ने अपना देशव्यापी मुलाकात का कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है. इसकी शुरुआत 20 अक्टूबर को विशाखापत्तनम से होगी. यहां टीचर्स के ग्रुप से समिति के सदस्य मिलकर उनकी राय जानेंगे.
इसके बाद 22 अक्टूबर को बेंगलुरु अगला पड़ाव होगा. वहां भी टीचर्स से उनकी मांगें और राय जानी जाएंगी. फिर 22 अक्टूबर को ही मुंबई के एक मैदान में वर्कर्स ग्रुप से मुलाकात का कार्यक्रम है. सूत्रों का कहना है कि इसके बाद एक अहम मुलाकात उद्योगपतियों के साथ 27 अक्टूबर को मुंबई में होगी. इस मुलाकात के लिए खास तैयारी की जा रही है, ताकि इसमें हर उद्योग से कम से कम एक प्रतिनिधि मौजूद रहे. उद्योगपतियों के साथ मुलाकात के लिए खुद कमेटी के मुखिया पी चिदंबरम मुंबई जाएंगे.
इसी तरह आने वाले दिनों में समाज के तमाम तबकों और प्रोफेशनल्स से मुलाकात करके घोषणापत्र समिति 2019 के लिए कांग्रेस का घोषणापत्र बनाएगी. दुर्गानवमी और विजयादशमी के ठीक अगले दिन से घोषणापत्र समिति अपने काम में जुटने जा रही है. इसको कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी के सॉफ्ट हिंदुत्व की तरफ झुकते रुख को कारण माना जा रहा है. हालांकि इस पर कांग्रेस की ओर से कोई टिप्पणी नहीं आई है.
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