उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों के साथ बीजेपी नेताओं की 7 घंटे बैठक चली. इस दौरान बीजेपी और सरकार की समीक्षा के साथ साथ राम मंदिर पर चर्चा हुई. आरएसएस ने बीजेपी नेताओं के सामने राम मंदिर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत के लिए गए अपने स्टैंड को साफ साफ तौर पर रखा.
शाह के सामने संघ ने रखी बातें
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह लखनऊ के आनंदी वाटर पार्क में आयोजित संगठन और संघ के बीच हुए समन्वय बैठक में शामिल हुए. इस दौरान आरएसएस नेताओं ने शाह को राम मंदिर के लिए कानून बनाने का सुझाव दिया.
बैठक के बाद बाहर निकल कर संघ के सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल ने कहा कि बीजेपी के साथ हमारी ये रूटीन बैठक थी. इसमें सिर्फ बीजेपी और उससे जुड़े संगठनों के कामकाज की समीक्षा हुई. इस बैठक में न तो राम मंदिर पर कोई बात नहीं हुई न ही मंत्रियों के कामकाज पर. जबकि सूत्रों की माने तो संघ ने बैठक में संघ प्रमुख का मंदिर पर लिए गए स्टैंड को साफ साफ रख दिया गया.
राम मंदिर पर संघ ने रखा अपना स्टैंड
सूत्रों की मानें तो राम मंदिर पर संघ प्रमुख के लिए गए स्टैंड को यानी कानून के जरिए मंदिर बनाने के प्रस्ताव को बीजेपी के सामने साफ तौर पर रखा. इसके साथ उस बात का हवाल दिया गया कि अगर संघ परिवार की तरफ से मंदिर बनाने को लेकर किसी भी तरह की कोई ढिलाई दिखती है तो इसका फायदा दूसरे दलों को मिलेगा. हिंदूवादी संगठन जो इन दिनों संघ और बीजेपी से नाराज चल रहे हैं, उन्हें दूसरे दल अपने साथ जोड़ने में सफल हो सकते हैं.
बीजेपी संगठन और संघ के साथ हुई समन्वय बैठक में राम मंदिर का मुद्दा उठाया गया. जबकि विस्तार से इसकी कोर ग्रुप में हुई, जिसमे संघ की तरफ से दत्तात्रेय होशबोले, डॉक्टर कृष्ण गोपाल और संघ से बीजेपी में आए रामलाल इसके अलावा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह योगी आदित्यनाथ केशव मौर्य दिनेश शर्मा भूपेंद्र यादव और महेंद्र पांडे मौजूद थे.
फैसले के इंतजार में अमित शाह
इस कोर ग्रुप की बैठक में बीजेपी ने अपने उसी पुराने स्टैंड को सामने रखा, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने साफ-साफ कहा कि हमें न्यायालय के आखिरी फैसले का इंतजार करना चाहिए. हालांकि साथ ही उन्होने फिर दोहराया कि 1990 में बीजेपी का राम मंदिर पर जो स्टैंड था, वही आज भी है यानी जल्द से जल्द मंदिर बनना चाहिए.
कैबिनेट में नए चेहरों को मौका?
समन्वय बैठक में योगी सरकार के कैबिनेट विस्तार के मुद्दे पर भी चर्चा हुई. इसके अलावा सरकार में काबिज कुछ चेहरों को दोबारा संगठन में भेजने पर भी मंथन किया है. सूत्रों का कहना है कि कुछ नए चेहरों को योगी कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है.
2019 चुनाव पर चर्चा
समन्वय बैठक में 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर मंथन हुआ. बीजेपी और उनके सभी संगठनों को साफ-साफ 2019 की तैयारी के लिए दिशा निर्देश दिए गए हैं. SC/ST एक्ट और सरकार और संगठन के तालमेल पर भी अलग-अलग घटकों ने अपनी राय रखी.
SC/ST एक्ट पर अमित शाह ने पार्टी की तरफ से और नेताओं को खासतौर से इससे जुड़ी भ्रांतियां और गलतफहमियों को दूर करने को कहा गया है. इसके साथ ही कहा गया है कि बड़े फैसलों के साथ खड़े होने की चुनौती भी होती है इसीलिए SC/ST एक्ट पर लोगों की शंका का निराकरण करें.
मंत्रियों के कामकाज पर सवाल
सूत्रों की मानें तो समन्वय बैठक में संघ की तरफ से प्रदेश के नौकरशाही पर भी सवाल उठाया गए. इसके अलावा कई मंत्रियों के कामकाज पर भी सवाल खड़े किए गए. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने राम मंदिर धारा 370 और यूनिफार्म सिविल कोड की तरफ इशारा करते हुए कहा कि सरकार को अभी कई बड़े महत्वपूर्ण काम करने है.
सपा-बसपा के गठबंधन
प्रदेश के बदलते राजनीतिक समीकरण के मद्देनजर गठबंधन को लेकर भी समन्वय बैठक में चर्चा हुई. सपा और बसपा के गठबंधन से उभरने वाले राजनीतिक चुनौतियां पर भी बीजेपी की तरफ से कई नेताओं ने बात रखी. लेकिन अमित शाह ने सबके सामने यह खुल कर कहा कि वह चाहते हैं कि मायावती और अखिलेश यादव जरूर गठबंधन करके सामने आए. इसके बाद बीजेपी उन से चुनाव लड़े ताकि गठबंधन की यह भ्रांति भी दूर हो सके.
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