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मिशन महागठबंधन: 10 दिसंबर को मोदी के खिलाफ एकजुट होंगे विपक्षी नेता

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टीडीपी नेता और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने पीएम मोदी को चुनावी प्रधानमंत्री बताते हुए कहा कि हमें 2019 में प्रधानमंत्री को बदला जाना चाहिए.



आगामी लोकसभा चुनाव में महज पांच महीने का समय बचा है. मौजूदा मोदी सरकार को चुनाव में टक्कर देने के लिए विपक्ष एक बार फिर एकजुट हो रहा है. शनिवार को टीडीपी नेता और आंध्र प्रदेश के सीएम एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि विभिन्न पार्टियां गठबंधन का एजेंडा तैयार करने के लिए 10 दिसंबर को बैठक करेंगी.

विपक्ष की ओर से पीएम कैंडिडेट के सवाल पर नायडू ने कहा कि कई ऐसे अनुभवी नेता हैं जो प्रधानमंत्री बनने के लिए समर्थ हैं. मैं प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहता हूं, क्योंकि मेरी जिम्मेदारी बस अमरावती को आंध्रप्रदेश की राजधानी के रूप में विकसित करना है. मुझे अपने नए राज्य का विकास करना है.



टीडीपी नेता ने कहा कि मोदी ‘चुनावी प्रधानमंत्री’ हैं जो चुनाव के समय सभी की आलोचना करते हैं. उन्होंने कहा कि हमें चुनावी प्रधानमंत्री नहीं चाहिए. हमें ऐसा प्रधानमंत्री चाहिए जो शासन करे. प्रधानमंत्री को बदला जाना चाहिए और अच्छा प्रधानमंत्री लाया जाना चाहिए.

बता दें, पिछले कुछ महीने से चंद्रबाबू नायडू भाजपा विरोधी दलों के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं. बीते दिनों उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बसपा सुप्रीमो मायावती, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश सिंह यादव, डीएमके चीफ एमके स्टालिन, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी.

बताया जा रहा है कि 10 दिसंबर को होने वाली इस बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, जनता दल (सेक्यूलर), बसपा, सपा, डीएमके, आम आदमी पार्टी समेत कई पार्टियों के प्रतिनिधि हिस्सा ले सकते हैं.





मोदी...मोदी...मोदी...ये शोर अबतक बीजेपी की चुनावी रैलियों में नजर आता था. लेकिन अब 3 राज्यों के एग्जिट पोल में भी यही शोर सुनाई दे रहा है. उत्तर प्रदेश के एग्जिट पोल नतीजों में तो मोदी कई इलाकों में 800 फीसदी तक सीटें बढ़ाते दिख रहे हैं और यूपी की सत्ता में बीजेपी की धमाकेदार ताजपोशी का सेहरा भी उनक


देश में आज की तारीख में चुनाव हो जाएं तो क्या हो? सर्वे से जानने की कोशिश की गई कि आखिर मोदी सरकार को लेकर लोग अब क्या सोच रहे हैं. जेएनयू की घटना से पहले का ये सर्वे है. जानें क्या आज भी लोग एनडीए को उतनी सीट देने को तैयार हैं जितनी 2014 में दी थीं? क्या यूपीए को कुछ लाभ होता दिख रहा है?



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