पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ गए। चूंकि नतीजे, 2019 में आम चुनाव से कुछ ही महीने पहले आए हैं, ऐसे में इनमें भविष्य की राजनीतिक तस्वीर भी देखी जा रही है। दरअसल, इस जनादेश में दो चीजें बिल्कुल साफ नजर आ रही हैं।
#पहली बात
राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद ताकतवर नेता के तौर पर सामने आ रहे हैं। उनके नेतृत्व में गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी मजबूती से उठती दिखी तो कर्नाटक में उन्होंने सूझबूझ का परिचय देते बीजेपी को सत्ता हासिल करने से रोक दिया। अब मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में उनके नेतृत्व में पार्टी सत्ता के मुहाने पर खड़ी है। यह राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस का एक नया युग है।
#दूसरी बात
2013 से अब तक बीजेपी का चेहरा बने हुए और भारतीय राजनीति के इतिहास में अब तक सर्वाधिक ताकतवर गैर कांग्रेसी नेता नजर आ रहे नरेंद्र मोदी का जादू फीका पड़ता नजर आ रहा है। लोकप्रियता के मामले में भले अब भी मोदी सबसे आगे हों, लेकिन पांच राज्यों के नतीजे उनके जादुई नेतृत्व पर एक सवाल बनकर चस्पा हो गए हैं। अब तक जिन चीजों की वजह से मोदी ने लगातार उड़ान हासिल की, उनकी तारीफ़ होती रही, एक झटके में वही वजहें मोदी के लिए नए-नए सवाल लेकर खड़ी हो चुकी हैं।
भले ही बीजेपी हिंदी पट्टी के जनादेश को राज्य सरकारों के काम से जोड़कर मोदी को बचाने की कोशिश में है, लेकिन नतीजों को मोदी विरोधी रुझान का संकेत साफ नजर आता है। दरअसल, तेलंगाना और मिजोरम को छोड़ दिया जाए तो हिंदी पट्टी में बीजेपी के खिलाफ जिन मुद्दों पर वोट मांगे गए उन्हीं मुद्दों के सहारे नरेंद्र मोदी 2014 से राजनीति में परचम लहराते आ रहे थे। वो चाहे युवाओं की बेरोजगारी का मुद्दा हो, किसानों की बदहाली हो, पूंजीपतियों का भ्रष्टाचार और हिंदुत्व यानी राम मंदिर का मुद्दा हो। नोटबंदी और जीएसटी भी मोदी की साख पर बट्टा लगाती नजर आ रही हैं।
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