कुंभ के प्रथम स्नान मकर संक्रांति पर 15 जनवरी को देश-दुनिया के कोने-कोने से आने वाले संतों-भक्तों को पहली बार पुण्य की डुबकी लगाने के लिए आठ किमी लंबा संगम का किनारा मिलेगा। विश्व भर में इस कुंभ के प्रचार-प्रसार को देखते हुए कुंभ मेला प्रशासन ने पुराणों के आधार पर धर्माचार्यों की मदद से संगम का नया विस्तार कर रविवार को स्नान की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया। इस बार शिवकुटी से लेकर अरैल में सोमेश्वर महादेव के बीच गंगा के दोनों तटों पर बनाए गए स्नान घाटों पर संगम की डुबकी लगेगी। मेला प्रशासन ने मकर संक्रांति स्नान पर 1.50 करोड़ से अधिक भक्तों के प्रयागराज पहुंचने का अनुमान लगाया है। कड़ी सुरक्षा के बीच श्रद्धालु संगम स्नान कर दुनिया के सबसे बड़े संत-भक्त समागम का हिस्सा बनेंगे।
मकर संक्रांति पर फाफामऊ से अरैल के बीच बने स्नान घाटों पर श्रद्धालु डुबकी लगाएंगे। 20 सेक्टर में बसे कुंभनगर के 18 सेक्टरों में गंगा के दोनों किनारों पर संगम स्नान के लिए घाट बनाए गए हैं। घाटों पर स्नान के दौरान श्रद्धालु गहरे पानी न जाने पाएं, इसके लिए बैरीकेडिंग कराई गई है। साथ ही सुरक्षा जाल भी लगवा दी गई है, ताकि डुबकी लगाने के दौरान अगर किसी का पैर फिसल जाए तो भी वह गहरे जल में न जाने पाए। हर स्नान घाटों पर मजिस्ट्रेट और सीओ की ड्यूटी लगा दी गई है। साथ ही गोताखोरों के दस्ते भी लगातार स्नान घाटों पर तैनात हैं। जल पुलिस मोटरबोट से संगम के लंबे जलमार्ग पर लगातार गश्त कर कर रही है। स्नानार्थियों की सुविधा के लिए सेक्टरवाइज पहुंच मार्गों पर 95 स्थानों पर पार्किंग बनाई गई है। वाहनों से आने वाले तीर्थयात्रियों को संगम जाने से पहले मेला क्षेत्र के सभी रूटों पर पार्किंग मिलेगी। एहतियात के तौर पर स्नान की व्यवस्था के लिए एनडीआरएफ के अलावा पुलिस, पीएसी और आरएएफ को तैनात कर दिया गया है।
कुंभ की इस तरह हुई तैयारी
375 किमी लंबी कुंभनगर की सड़कों पर बिछाई गईं 73120 से अधिक चकर्ड प्लेट
22 पांटून पुलों से होकर कुंभ मेला क्षेत्र में संगम तक पहुंचेंगे श्रद्धालु
18 सेक्टर में बनाए गए स्नान घाट
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