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निर्यात की बाधाएं दूर करने को पीएम मोदी से हस्तक्षेप का किया आग्रह

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 नई दिल्ली। निर्यात की रफ्तार बढ़ाने के रास्ते में आ रही दिक्कतों का समाधान निकालने के लिए अब निर्यातकों ने प्रधानमंत्री से आस लगायी है। निर्यात एसोसिएशनों के फेडरेशन फियो ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि अगर एक्सपोर्ट क्रेडिट से लेकर जीएसटी रिफंड जैसे छोटे छोटे मुद्दों को सुलझा लिया जाए तो निर्यात की रफ्तार 20 फीसद तक पहुंचाई जा सकती है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशन यानी फियो के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता ने दैनिक जागरण से विशेष मुलाकात में कहा कि कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर सरकार अगर निर्णय ले ले तो भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है। गुप्ता ने कहा कि पांच प्रतिशत इंट्रेस्ट इक्विलाइजेशन की सुविधा का लाभ अभी केवल मैन्यूफैक्चरर को मिलता है। यदि इसका लाभ मर्चेट एक्सपोर्टरों को भी मिले तो उनके उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में टक्कर ले सकेंगे। गुप्ता ने कहा कि यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि मर्चेट एक्सपोर्टर कुल निर्यात में 37-40 फीसद की हिस्सेदारी करते हैं।
दूसरी सबसे बड़ी समस्या निर्यातकों के लिए बैंकों से मिलने वाले कर्ज की है। गुप्ता कहते हैं कि निर्यातकों को आज भी बैंकों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उनके बेहिसाब सवालों का जवाब देना होता है। बावजूद इसके निर्यातकों को कर्ज नहीं मिल रहा। दिक्कत यह है कि बैंक अधिकारियों से मिलना भी निर्यातकों के लिए बेहद मुश्किल हो गया है। गुप्ता ने कहा कि इस बारे में वित्त मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय से भी दरख्वास्त की जा चुकी है। फियो ने सुझाव दिया है कि सरकार को निर्यातकों को कर्ज मंजूर करने से लेकर वितरण तक के लिए समय सुनिश्चित कर देना चाहिए।
निर्यातकों का एक बड़ा मुद्दा ईरान के साथ कारोबार शुरू होने का है। अभी तक ईरान की कंपनियों को विदहोल्डिंग टैक्स का मुद्दा नहीं सुलझा है। अमेरिका ने भारत को छह माह यानी 180 दिन की छूट दी है। लेकिन लगभग दो महीने का वक्त होने को आया है अभी तक इस संबंध में अधिसूचना जारी नहीं हो पायी है। ईरान से होने वाले तेल आयात का भुगतान यूको बैंक के जरिए होना है। लेकिन यह तभी संभव हो पाएगा जब विदहोल्डिंग टैक्स से छूट देने संबंधी अधिसूचना जारी हो जाए।
फियो ने जीएसटी लागू होने के बाद ड्राबैक लेने के लिए मिली छह महीने की अवधि में अधिक ड्राबैक लेने वाले निर्यातकों को जीएसटी रिफंड नहीं मिलने के मुद्दे को भी प्रधानमंत्री के समक्ष उठाया है। फियो अध्यक्ष ने कहा कि शुरुआती समय में ज्यादातर निर्यातकों को यह जानकारी नहीं थी कि उच्च दर पर ड्राबैक लेने पर जीएसटी रिफंड नहीं मिलेगा। मसलन अगर तीन प्रतिशत निचली दर के मुकाबले चार प्रतिशत की उच्च दर पर ड्राबैक लिया है तो भले ही वह 18 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान कर रहा है। बावजूद इसके उसे रिफंड सिर्फ इसलिए नहीं मिल रहा क्योंकि वह ड्राबैक ले चुका है। फियो ने सरकार से इस विसंगति को दूर करने का आग्रह किया है।
इसके अतिरिक्त फियो ने प्रधानमंत्री को एडवांस अथॉराइजेशन स्कीम के तहत आइजीएसटी में छूट की नीति में हुए बदलाव से भी राहत दिलाने की मांग की है। अब निर्यातक बिना आयात किये अपने पास रखे कच्चे माल से निर्यात योग्य उत्पाद बना नहीं सकते। गुप्ता का कहना है कि इससे निर्यातकों का डिलीवरी टाइम बढ़ गया है जिसकी वजह से प्रतिस्पर्धी वैश्विक बाजार में बने रहने में उन्हें दिक्कत आ रही है।


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