हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान व्यापक पैमाने में हुई तोड़फोड़, हिंसा और आगजनी से जुड़ी 407 एफआईआर को वापस लेने की हरियाणा सरकार जो तैयारी कर रही थी, उस पर पंजाब-हरियाणा हाई कोर्टने इन सभी एफआईआर को वापस लिए जाने पर रोक लगा दी है। साथ ही सभी ट्रायल कोर्ट को भी आदेश दे दिए गए हैं कि जिन केसों में दर्ज एफआईआर को वापस लिए जाने की अर्जी दी गई है, उन पर सुनवाई न की जाए।
हरियाणा सरकार को यह झटका बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान लगा। मामले पर करीब 2 घंटे तक चली बहस के बाद हाई कोर्ट ने अब यह भी साफ कर दिया है कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान के सभी मामलों को इश्यू फ्रेम कर चार हिस्सों में बांट कर सुनवाई की जाएगी।
इनमें पहला मामला आंदोलन के दौरान तोड़फोड़ का शिकार बनी उस मूनक कनाल से जुड़ा है जिसकी जांच सीबीआई को सौंपी जा चुकी है। दूसरा मामला कथित मुरथल गैंग रेप का है। तीसरा मामला आंदोलन के दौरान हुई हिंसा-तोड़फोड़ और आगजनी का और चौथा दर्ज की गई एफआईआर वापस लेने और कुछ अन्य में एफआईआर पर कैंसिलेशन रिपोर्ट दायर किए जाने से संबंधित है।
कोर्ट में सुनवाई के बाद जब हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हमें हाई कोर्ट के फैसले का पालन करना होगा । मामले में जो भी कोर्ट ने आदेश दिए हैं उसी अनुरुप आगे की कार्रवाई होगी ।